वली.ए.कामिल हुजूर अमीर खुसरो साहब के नाम

हज़रत अमीर खुसरो साहब की जात एक वली और सूफी के नाम से मन्सूब है आप बड़ी बुज़ुर्ग शख्सियत के मालिक हैं आपका आस्ताना हिन्दुस्तान की राजधानी दिल्ली में मौजूद है |


हुज़ूर अमीर खुसरो साहब के बचपन का नाम अबुल हसन यामीनउददीन था आपके वालिद (पिता) का नाम हज़रत अमीर सैफउददीन और वालिदा (माता) हिन्दू खानदान से थीं |


आपकी पैदाईश 652 हिo (1256 ईo) में जिला एटा के पटियाली गांव में हुई थी आपकी दीनी तालीम हज़रत निजा़मुददीन औलिया ने शुरू कराई जो अपने ज़माने की सबसे बड़ी सूफी वली थे | आगे चलकर हज़रत निज़ामुददीन औलिया आपके पीरो मुर्शिद हुये | बचपन से ही इल्म की ख्वाहिश रखने वाले हज़रत अमीर खुसरो ने बहुत जल्द कई जु़बानों में महारत हासिल कर ली लोग वली अमीर खुसरो को अरबीए फारसीए उर्दूए हिन्दी का जादूगर कहते थे |


उर्दू ज़ुबान को बढ़ावा देने के लिये आपने नज़्म कव्वाली गज़लों को खूबसूरत ढंग से लिखा जिससे आपने लोंगों के दिलों पर राज़ किया |


नये सत्र में न्यू खुसरो डिग्री काॅलेज सभी छात्र/छात्राओं के बेहतर मुस्तक़बिल की दुआ करता है और डिग्री काॅलेज परिवार का हिस्सा होने के लिये उनका तहेदिल से इस्तक़बाल करता है |


आज उर्दू ज़ुबान ने तहज़ीब में जो अव्वल दर्जा़ पाया है वो मुकाम हज़रत अमीर खुसरो ने ही दिलाया है यही नहीं आपने मुहावरे पहेली रूवाईयां भी लिखी जो आज तक मशहूर हैं|


अमीर खुसरो एक अच्छे मौसिका़र पुरअसरार शख्सियत फ़लसफ़ी सांइसदाॅं तारीखदाॅं सभी कुछ थे दिल्ली के सुल्तान ग़यासुददीन बलवान और उनके बेटे मुल्तान मुहम्मद खाॅं ने इनकी बहुत मदद की इस खियती मौसिकार और वली शायर ने बहुत से एसे बजने वाले साजों को इजाद किया जैसे पखावज को काटकर तबला बनाया और वीणा में बदलाव लाकर सितार बनाया मौसिक़ारकी शक्ल में इन्होंने कई तर्जें बनाई छन्दों को तोड़ मरोड़ कर नये छन्द बनाये जैसे कव्वालियों को बहुत उम्दा तरीके से पेश किया उन्होंने फ़ारसी अरबी और ब्रजभाषा में जो अदबी तहरीरें लिखीं वह पूरी इंसानी क़ौम के लिए नायाब तोहफ़ा हैं |

अब्दुल माजिद दरियाबादी ने खुसरो के बारे में कहा कि वह अमीरों में अमीर फक़ीरों में फकी़र आरिफों में सरदार शायरों में ताजदार शेरों अदब के दीवान उनकी अदबों अज़मत की गवाह खानकाहें उनके मतबेे सहानी से आगाह है |

सरे मुशायरे आ जाए

तो मीर महफ़िल उसे पाइये |


इन सबसे अलग आपका दिल हिन्दुस्तान के लिये धड़कता था वो हिन्दुस्तान की सरज़मीन को ज़न्नत की क्यारी कहते थे आपकी मज़हबी तहकीक ने लड़ाई झगड़ों और फसादों को दूर किया और वतन परस्ती पर की गई बहुत सी शायरी से लोगों का दिल छुआ और दिलों को जोड़ने का काम किया जिसकी सीख हर ेेंसान को मुल्क़ो मज़हब के लिये सच्चे हिन्दुस्तानी की तरह रहना सिखाती है |


न्यू खुसरो एजुकेशनल सोसायटी हज़रत अमीर खुसरो की याद में बनाई गई क्योंकि सोसायटी के प्रबन्धक के वालिदे मोहतरम मरहूम मो0 मेंहदी अली ज़ाफरी हुज़ूर अमीर खुसरो के बहुत बड़े आशिक़ थे |और आपको खिराज़े अक़ीदत पेश करते थे|

इस सोसायटी को हज़रत के नाम से जोड़कर मोहतरम मरहूम मो0 मेंहदी अली ज़ाफरी को इसाले सबाब व हज़रत वली ए कामिल हज़रत अमीर खुसरो साहब को सच्ची अक़ीदत पेश की गई है